आ सकता है टेस्ट क्रिकेट में नया नियम, नो बॉल पर हो सकती है ‘फ्री हिट

क्रिकेट के सीमित प्रारूपों की तरह अब टेस्ट में भी नो बॉल पर फ्री हिट का नियम लागू हो सकता है। टेस्ट क्रिकेट की अहमियत और रोमांच को बरकरार रखने के लिए इसमें किए जा रहे निरंतर बदलावों के अंतर्गत एमसीसी विश्व क्रिकेट समिति ने यह प्रस्ताव पेश किए हैं।

टेस्ट प्रारूप में विभिन्न बदलावों पर गत सप्ताह बेंगलुरू में हुई एमसीसी समिति की बैठक में चर्चा की गई थी और अब इन प्रस्तावों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के सामने पेश किया जाएगा। क्रिकइंफो की रिपोर्ट के अनुसार एमसीसी विश्व क्रिकेट समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व इंग्लिश कप्तान माइक गैटिंग तथा पूर्व ऑस्ट्रेलियाई लेग स्पिनर शेन वॉर्न ने इन प्रस्तावों की रूपरेखा तैयार की है।

समिति ने खेल के सबसे बड़े प्रारूप में फ्री हिट के नियम को लेकर दलील दी है कि यह नियम सीमित प्रारूप में अब तक बहुत सफल रहा है और इससे गेंदबाजों का नो बॉल करना कम हुआ है। ऐसे में टेस्ट प्रारूप में भी यह नियम लागू होना चाहिए।

शेन वॉर्न ने समझाते हुए कहा,“ समझिए कि मैंने एक गेंद डाली और अंपायर ने उस पर आउट दे दिया और इस पर रेफरल मांगा गया। बाद में पता चला कि यह तो नो बॉल थी, और बल्लेबाज को लगा कि वह तो आउट हो गया जबकि वह आउट था ही नहीं, वहीं उसके बाद उसे इस गेंद पर फ्री हिट मिल रही है। सोचिये कि दर्शक कैसा महसूस करेंगे। दर्शकों का इससे खेल में रेामांच बढ़ेगा और वे घर जाकर भी इस पर बात करेंगे कि बल्लेबाज तो खुद को आउट सोच रहा था लेकिन उसे तो फ्री हिट मिल गयी। दर्शकों में आप इससे रोमांच की कल्पना नहीं कर सकते।”

उन्होंने कहा,“ जब फ्री हिट का नियम टी-20 और वनडे में है तो टेस्ट क्रिकेट में ऐसा क्यों नहीं है। यह नो बॉल की स्थिति में भी मददगार होगा। सोचिए कि इंग्लैंड ने पिछले तीन सालों में वनडे में पहली बार नो बॉल किया है क्योंकि इस पर फ्री हिट मिलती है। टेस्ट क्रिकेट में यह नियम लागू होने पर नो बॉल की संख्या में कमी आयेगी। यह एक बड़ा बदलाव होगा और हम आईसीसी से इसकी सिफारिश करेंगे और उम्मीद है कि वह इस पर संज्ञान लेगा।”

गैटिंग ने बताया कि दुनियाभर के मौजूदा खिलाड़ियों से उनकी राय मांगी गई थी, जिसमें भारतीय कप्तान विराट कोहली भी शामिल थे। विराट ने गत वर्ष वेस्टइंडीज के साथ घरेलू टेस्ट सीरीज़ के दौरान एसजी गेंदों के उपयोग पर नाराजगी जतायी थी। इसके अलावा भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी लाल ड्यूक गेंदों के इस्तेमाल पर अपनी हरी झंडी दी है जो पिछले कई सालों से काउंटी क्रिकेट में इस्तेमाल कर रहे हैं।

एमसीसी समिति के प्रमुख ने कहा,“हमने विराट कोहली जैसे खिलाड़यिों और उनकी पसंद को ध्यान में रखा है। इन जैसे बड़े खिलाड़यिों ने ड्यूक गेंदों को तरजीह दी है और उसे एक अच्छे स्तर की गेंद माना है, हम आगे इसका ध्यान रखेंगे और इसके इस्तेमाल को महत्व देंगे। इससे सपाट विकेट पर भी बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ों के पास समान मौका मिलेगा। हमारे लिये खिलाड़ियों  की राय जरूरी है क्योंकि अंतत: उन्हें ही इन गेंदों से खेलना होगा।”

समय बबार्दी रोकने के लिए होगा टाइमर……..एमसीसी समिति ने टेस्ट क्रिकेट के धीमे खेल में तेज़ी लाने के लिये ‘टाइमर’ के इस्तेमाल की भी सिफारिश की है। समिति ने प्रस्ताव में कहा कि स्कोरबार्ड पर टाइमर लगाया जाएगा और ओवर समाप्ति के बाद नये बल्लेबाज़ के स्ट्राइक पर आने के लिये 60 सेकंड का समय और गेंदबाज़ के बदलाव के लिये 80 सेकंड का समय निर्धारित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि दोनों में से यदि कोई भी टीम खेल के लिये तैयार नहीं होगी उसे चेतावनी जारी की जाएगी। यदि आगे भी किसी टीम से देरी की जाती है तो पारी में उन्हें पांच रन की पेनल्टी दी जा सकती है, यह पांच रन विपक्षी टीम को दे दिये जाएंगे।

समिति के अनुसार इसी तरह के टाइमर का उपयोग विकेट गिरने, ड्रैसिंग रूम से पिच तक खिलाड़ी के पहुंचने (दूरी के अनुसार) और ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान भी किया जाएगा। बल्लेबाज़ और फील्डरों को घड़ी के शून्य तक पहुंचने तक अपनी स्थिति में बरकरार रहना होगा।

इसके अलावा अंपायर समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) के उपयोग के दौरान भी समय का ध्यान रखा जाएगा। उदाहरण के तौर पर पगबाधा की जांच के लिये ‘बॉल ट्रैकिंग सिस्टम’ के इस्तेमाल के बाद टीवी अंपायर को तुरंत निर्णय की जानकारी दी जाएगी ताकि समय की बबार्दी न हो।

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